STORYMIRROR

शालिनी मोहन

Drama

3  

शालिनी मोहन

Drama

तो.....कविता बनती है

तो.....कविता बनती है

1 min
462

आसमान में खिला चाँद

जब पानी में उतरता है

मूक बादल जब

कोहरे में सिमटता है।


झिलमिल सितारा

जब टूट के बिखरता है

और बिखरे गुलाब़

जब हृदय पटल पर सजा लो,


तो..... कविता बनती है

 रेत पर जब

नदी ठहरती है

गीले पाँव छूके।


जब कोई हवा गुुुज़रती है

दिवाली के दीये में

जब होली के रंग झलके

और इन्द्रधनुष के डोर खींच

जब मोर नचा लो

तो.....कविता बनती है।


कविता एक सरिता है

शब्द में जब

भाव चिपकते हैं

और स्याही से उतरते हैं

तो.....कविता बनती है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama