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Jayshri Rajput

Tragedy Inspirational

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Jayshri Rajput

Tragedy Inspirational

तिनका

तिनका

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हम भी कैसे मूरख थे, जो आस़ तिनके से आशियाना बनाने की लगाई थी -२

मामूली से हवा के झोंके ने बेघर कर दिया, और एक तिनके ने ही आग लगाई थी...!!


मुश्किल था खुद के खातिर जीना, जब बात यह समझ आई थी -२

हम उस तिनके के सहारे चल ही दिए, जब बात मोहब्बत की आई थी...!!


समझाने का आलम बहुत था, पर समझने की खुशी ना थी -२

बेअसर था मेरा बरसना, मेरे बरसने की किसी को पड़ी ना थी...!!


खुदगर्ज से इस जहां में, दिल में मेरे कुछ सा शोर था -२

उस तिनके के सहारे हमने काटी जिंदगी, उम्मीद का बस यही मोड़ था...!!


सोचा खुद को कुछ थोड़ा शांत रखें, दिल के कुछ तो पास रखें -२

आखिरी आस का वो तिनका ही नजर आया, सोचा उस तिनके को ही हम पास रखे...

सोचा उस तिनके को ही हम पास रखे!!


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