तिनका
तिनका
हम भी कैसे मूरख थे, जो आस़ तिनके से आशियाना बनाने की लगाई थी -२
मामूली से हवा के झोंके ने बेघर कर दिया, और एक तिनके ने ही आग लगाई थी...!!
मुश्किल था खुद के खातिर जीना, जब बात यह समझ आई थी -२
हम उस तिनके के सहारे चल ही दिए, जब बात मोहब्बत की आई थी...!!
समझाने का आलम बहुत था, पर समझने की खुशी ना थी -२
बेअसर था मेरा बरसना, मेरे बरसने की किसी को पड़ी ना थी...!!
खुदगर्ज से इस जहां में, दिल में मेरे कुछ सा शोर था -२
उस तिनके के सहारे हमने काटी जिंदगी, उम्मीद का बस यही मोड़ था...!!
सोचा खुद को कुछ थोड़ा शांत रखें, दिल के कुछ तो पास रखें -२
आखिरी आस का वो तिनका ही नजर आया, सोचा उस तिनके को ही हम पास रखे...
सोचा उस तिनके को ही हम पास रखे!!
