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Ajay Gupta

Drama

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Ajay Gupta

Drama

तिलक से राजतिलक

तिलक से राजतिलक

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हर चुनाव बन कर आता है, जैसे नव सूर्योदय

मिल कर सभी प्रयास करें तो, सम्भव है भाग्योदय।


चलो बनाएं ऐसा भारत, हम सब इसके वासी,

जहां न कोई राजा-रानी, रहे न दास न दासी।


हर इक मत सूरज के जैसा, कर देगा उजियारा,

राष्ट्र हितैषी होगा निर्णय, प्रण हो यही हमारा।


लोकतंत्र के अधिकारों का, हमने ऋण चुकाया।

हमने उंगली तिलक करा कर, अपना धर्म निभाया।



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