Independence Day Book Fair - 75% flat discount all physical books and all E-books for free! Use coupon code "FREE75". Click here
Independence Day Book Fair - 75% flat discount all physical books and all E-books for free! Use coupon code "FREE75". Click here

Ajay Gupta

Abstract Drama


2.5  

Ajay Gupta

Abstract Drama


हिम्मत का मुखौटा

हिम्मत का मुखौटा

1 min 449 1 min 449

किसने कहा

कि जज़्ब कर जाते हैं ग़म

और दम खोते नहीं

ग़लतफ़हमी है दुनिया को

कि मर्द हैं रोते नहीं


किसी प्रियजन को खोने का

या हानि का व्यापार में

घर में आई विपदाएं

या टूटती मर्यादाएँ संसार में

सब विचलित करती हैं

आँखें ही तो भिगोते नहीं

ग़लतफ़हमी है दुनिया को

कि मर्द हैं रोते नहीं


हम ने आपा खो दिया

तो ढाढस कौन बंधायेगा

जिस पर आगे बढ़ जाना है

रास्ता कौन दिखायेगा

ज़िन्दगी के खेत मे हम

निराशाएँ बोते नहीं

ग़लतफ़हमी है दुनिया को

कि मर्द हैं रोते नहीं


डर हमें भी लगता है

दुख होता है हमको भी

लेकिन सबकी हिम्मत आखिर

में बनना है हमको ही

सच तो है कि पहने हमने

हिम्मत भरे मुखौटे हैं

हम कहते हैं मानो दुनिया

मर्द है तो क्या? रोते हैं



Rate this content
Log in

More hindi poem from Ajay Gupta

Similar hindi poem from Abstract