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Ajay Gupta

Abstract

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Ajay Gupta

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एकाधिकेन

एकाधिकेन

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अंधकार में एक दीये से

पग-पग आगे बढ़ता जा बस

मरुभूमि को हरा-भरा कर

बीज यहाँ पर बोता जा बस


एक नया सागर तू भर ले

बूँद-बूँद तू भरता जा बस

गगन चूमता भवन बनेगा

ईंट ईंट तू रखता जा बस


तेरा कारवाँ बन जायेगा

सबको साथ मिलाता जा बस

रंगों से उपवन भर जाएगा

एक-एक फूल खिलाता जा बस


पहले तुझ पर लोग हँसेंगें

उनको देख भुलाता जा बस

फिर तू छू लेगा आकाश

पंख मगर फैलाता जा बस


नए रचेगा कीर्तिमान तू

मील के पत्थर गिनता जा बस

दौड़ अलग होगी सबसे ही

राहें अपनी रचता जा बस


एक कदम के बाद तू अगला

कदम बराबर रखता जा बस

एकाधिकेन का अर्थ यही है

इसे ही मन में धरता जा बस।


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