थक जाती है सरकार
थक जाती है सरकार
नंगे पांव चलता हूँ मैं, थक जाती है सरकार
भूखे प्यासे लोग सभी, हुए हैं लाचार, बीमार
नंगे पांव चलता हूँ मैं, थक जाती है सरकार
कोष से राहत आता, पर हमको मिल न पाता
कुछ बिचौलिए खाए, सरकार हुई है लाचार
घोर पीड़ा मन मे है, पसीनें से भींगा बदन
गर्मी इतनी भीषण है, कि सुख गए हैं आँसू
राहत सामग्री का यहाँ, बस हो रहा है व्यापार
नंगे पांव चलता हूँ मैं, थक जाती है सरकार
खेल क्या है मालूम नहीं, ख़ता क्या है मालूम नहीं
कुछ लोग आते हैं पास, फ़ोटो खिंचवाते है साथ
हमको मिलता कुछ नहीं, लगाना पड़ता है जयकार
नंगे पांव चलता हूँ मैं, थक जाती है सरकार
हमसे सारे राजमहल हैं, हमी से राजा महाराजा हैं
हम हैं तो दुनिया है ये, हमी से कल कारखाने हैं
पर हमसे नहीं किसी को, है थोड़ा सा भी प्यार
नंगे पांव चलता हूँ मैं, थक जाती है सरकार
मंजिल मेरी बहुत दूर, मैं भी हूँ उतना मजबूर
जलती धरती तपता रवि,
केवल राहत की आस में फसा हुआ है मजदूर
राहत हमको मिलती नहीं, न ही करते हैं वो देने से इनकार
नंगे पांव चलता हूँ मैं, थक जाती है सरकार।।
