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Samrat Singh

Tragedy

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Samrat Singh

Tragedy

गिराने में

गिराने में

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उलझ गई है जिंदगी रिश्तों के ताने बाने में

अपराध नए हो रहे कुछ जाने में अनजाने में

छाले कितने पाँव में है कहाँ किसी ने देखा है

लोग लगे हुए है यहाँ नीचे हमे गिराने में।


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