STORYMIRROR

Abhishek Singh

Romance Tragedy

4  

Abhishek Singh

Romance Tragedy

कागज़ के ख़त

कागज़ के ख़त

1 min
255

कागज़ के ख़त बचा रखे हैं

हमने मोहब्बत के किस्से सुना रखे हैं


दिल से एक बार पूछो तो सही

कोने मे कोनसे राज छुपा रखे हैं


ये अदा और नज़ाकत ज़रा आराम से

तुमने कितने दीवाने बना रखे हैं


दिन गुज़रता ही नहीं उसकी याद बिन

हमने वो सारे पल सजा रखे हैं


वस्ल- ऐ-यार पे खुश थे हम बहुत

फुरकत मे हमने भी आंसू बहा रखे हैं


सच बिक गया हैं किसी शह के माफिक

यहाँ सबने झूठ के दाम लगा रखे हैं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance