STORYMIRROR

Abhishek Singh

Romance

4  

Abhishek Singh

Romance

इश्क़ का इनाम

इश्क़ का इनाम

1 min
238

इश्क़ का इनाम लेकर झूमता हूँ

कौड़ियों के दाम लेकर झूमता हूँ


शेर सुनकर मेरी दुनिया झूमती है

मैं तो उसका नाम लेकर झूमता हूँ


कुछ नहीं बस चाय पी है यार के साथ

सब ने समझा जाम लेकर झूमता हूँ


याद है वो पहला चुम्बन पहली बारिश

अब तलक एक शाम लेकर झूमता हूँ


कोई तोहफ़े मे किताबें दे गया कल

कल से चारो धाम लेकर झूमता हूँ।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance