STORYMIRROR

Umesh Shukla

Tragedy

4  

Umesh Shukla

Tragedy

अंधों के हाथ

अंधों के हाथ

1 min
256


अंधों के हाथ कभी जो लग

जाती किस्मत से कोई बटेर

तो वे इतराते घूमते ऐसे कि

जैसे हों वे धनाधिपति कुबेर

सही व्यवस्थाएं बनाने में उनका

कलेजा हो जाता है फांक फांक

फिर भी वे खुद को मानते हैं

प्रबंधन में औरों से चालाक

दूजों के दोष निहारते हर क्षण

करके दोनों नयनों में विस्तार

अपनी कमियों के लिए रखते

हर समय एक पे तर्क हजार

प्रभु हम पर करना कृपा रखना

ऐसे अंधों से सदैव दूर ही दूर

ताकि हमारे मानस में सदैव ही

उच्च हौसला कायम रहे भरपूर



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy