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Sughosh Deshpande

Romance

0.3  

Sughosh Deshpande

Romance

तेरे लिए

तेरे लिए

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ये रक़्स मेरा जो दुनिया है देख रही,

तेरा इश्क़ है इसकी वजह

तू होगी जहाँ रहेगा वहाँ

हमेशा मेरा निशान।


दिल को तेरे,

सांसें मेरी पूजती है पनाह के लिए

धड़कनें चलती हैं तो बस...

तेरे लिए.. तेरे लिए...

तेरे लिए...तेरे लिए...


साया तेरा, मुझ पर गिर गया,

प्यार का, अंदाज़ तेरा,

मुझ पर छा गया, दीदार का

दूरी तुमसे है सजा मेरे लिए।


जी रहा हूँ जानेजान...

तेरे लिए... तेरे लिए...

तेरे लिए... तेरे लिए...


है रब तू मेरा,

रोज़ तुम्हारी, मेरा मन

इबादत है कर रहा

विशाल हो हमारे सातों जन्म,


यही है दुआ मेरी जानेमन

अश्क़ों ने रातों में पुकारा है,

अब तेरी याद में

तनहाइयाँ भी अच्छाी लगती है।


तेरे दर पर है मुझे रह जाना,

है दूजा नहीं कोई ठिकाना,

तुमको मुझे ही होगा अपनाना

के खुद से भी जो मैं लड़कर आया हूँ....


तेरे लिए... तेरे लिए...

तेरे लिए... तेरे लिए...


आहों को भुलाले,

शिकवों को भुलाले,

सिर्फ प्यार मुझे तू करले,

साथ मेरे तू सपने सजाले।


तेरे चाहत के नग्में गाता हूँ,

सादगी से तुमको चाहता हूँ

तेरा रूप जाम है,

जिससे देखते ही चढ़ती बेखुदी।


तेरा नाम मेरी तक़दीर में है लिखा,

जो मेरी तू हमख्वाब है बनी

हमसफ़र बनकर चल तू साथ मेरे,

छोडूंगा न कभी हाथ तेरा।


इल्तिजा करता हूँ, तेरी बाँहें,

आँखों में रोशनी,

दिल में आशिकी,

और ख़्वाबों की बंदगी है तो बस.....


तेरे लिए... तेरे लिए...

तेरे लिए... तेरे लिए...


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