STORYMIRROR

Vivek Netan

Romance

4  

Vivek Netan

Romance

सुनो ना जो कभी कहा नहीं

सुनो ना जो कभी कहा नहीं

1 min
316

सुनो ना जो कभी कहा नहीं 

वो आज तो कह लेने दो 

तेरे शहर में तो जगह ही नहीं 

तुम अपने दिल में तो रहने दो 


मत बांधो कसमों के सागर में 

मैं नदी हूँ मुझे बह जाने दो 

बस करो अपने शिकवे शिकायतें 

मुझे भी कभी मुस्कराने दो 


नहीं होता बयां इश्क़ मुझ से 

इन लबों को ख़ामोश रहने दो 

दिलो से दिल मिलना मुमकिन नहीं 

हाथों में हाथ तो रहने दो 


क्यों करते हो हर बार ऐसे 

जमाने की सुनते हो जमाने की सुनाते हो 

क्यों ना इस बार कुछ यों कर ले 

तुम अपनी कहो मुझे अपनी सुनाने दो 


मेरे हाथों की लकीरों में गर तुम नहीं 

मेरे माथे की लकीरों को भी आजमा लो 

बड़ा मुश्किल होगा मेरी कब्र तक आना 

मुझे अपनी बाहों में ही सो जाने दो 


थक सा गया हूँ इस नाकाम सफर से 

मुझे अपनी जुल्फों में खो जाने दो 

चुभती है रौशनी मेरी प्यासी आँखों में 

खिड़कियाँ खोल दो चिराग़ों को बुझ जाने दो 


और कितनी करूँ मैं इबादत तुम ही कहो 

इन बुतों को अब तो ख़ुदा हो जाने दो 

मेरे गीत पसंद किसी को आते ही नहीं 

तुम तो कुछ मुझे गुनगुनाने दो 


तेरा इंतज़ार भी हो गया है इक बहाना 

इस भ्रम को अब टूट जाने दो 

मेरी कश्ती के मुहाफिज कब तक हो तुम 

छोड़ दो मुझे यह कश्ती अब डूब जाने दो 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance