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Sanjay Jain

Romance

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Sanjay Jain

Romance

सुंदरता की....

सुंदरता की....

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नही होती सुंदरता किसी के भी शरीर में

ये बस भ्रम है अपने अपने मन का।

यदि होता शरीर सुंदर तो कृष्ण तो सवाले थे

पर फिर भी सभी की आंखों के तारे थे।

क्योंकि सुंदरता होती है उसके कर्म और विचार में

तभी तो लोग उसके प्रति आकर्षित होकर आते है।

वह अपनी वाणी व्यवहार और चरित्र से जाना जाता है

तभी तो लोग उसे अपना आदर्श बना लेते है।

जो अर्जित किया हमनेअपने गुरुओं से ज्ञान

वही ज्ञान को हम दुनियाँ को सुनता है।

जिससे होता है एक सभ्य समाज का निर्माण

फिर सभी को ये दुनियां,सुंदर लगाने लगती है।

इसलिए संजय कहता है, जमाने के लोगो से

शरीर सुंदर नही होता सुंदर होते उसके संस्कार।।  


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