Independence Day Book Fair - 75% flat discount all physical books and all E-books for free! Use coupon code "FREE75". Click here
Independence Day Book Fair - 75% flat discount all physical books and all E-books for free! Use coupon code "FREE75". Click here

Sanjay Jain

Abstract


3  

Sanjay Jain

Abstract


आदि सा हो गया हूँ*

आदि सा हो गया हूँ*

1 min 11.9K 1 min 11.9K


सागर से भी गहरा है,

हमारा रिश्ता।

आसमान से भी ऊंचा है,

हमारा रिश्ता।

दुआ करता हूँ 

ईश्वर से की।

ऐसा ही बना रहे

 हमारा रिश्ता।।


देखे बिना जान लेता हूँ।

बोले बिना ही तुम्हे, 

पहचान लेता हूँ।

रूह का रूह से जो है, 

हमारा रिश्ता।

इसलिए तो हर आहट,

तेरी जान लेता हूँ मैं।।


अब तो खुशियों से, 

दूर रहा करता हूँ मैं।

अंधेरों मैं जीने का, 

आदि हो गया हूँ मैं।

जब से गई है वो,

मेरी जिंदगी से दूर।

तभी से अंधेरों मैं,

जीने का आदि हो गया।।




Rate this content
Log in

More hindi poem from Sanjay Jain

Similar hindi poem from Abstract