Click here to enter the darkness of a criminal mind. Use Coupon Code "GMSM100" & get Rs.100 OFF
Click here to enter the darkness of a criminal mind. Use Coupon Code "GMSM100" & get Rs.100 OFF

Sanjay Jain

Abstract


4  

Sanjay Jain

Abstract


मूल बात*

मूल बात*

1 min 24K 1 min 24K

किसीको क्या दोष दे हम,

जब अपना सिक्का ही खोटा।

दिलासा बहुत देते है, 

स्वार्थी इंसान दुनियां के।


समझ पाता नहीं कोई,

उस मूल जड़ को।

जिसके कारण ही दिलोंं में, 

फैलती है अराजकता।


समानता का भाव तुम, 

जरा रखकर तो देखो।

बदल जायेगी परिस्थितियां,

इस जमाने के लोगों।

बस थोड़ी सी इंसानियत,


दिलोमें जिंदा तुम कर लो।

खुशाली छा जाएगी,

हमारे प्यारे भारत में।


मोहब्बत वतन से करोगे,

तो जन्नत तुम्हें मिलेगी।

अमन शांति का माहौल,

देश के अंदर बनेगा।


और लोगों के दिलों से,

नफरत खुद मिटा जाएगी।

फिर विश्व में भारत का

ही सिक्का सदा चलेगा।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Sanjay Jain

Similar hindi poem from Abstract