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Kishan Negi

Tragedy Classics Thriller

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Kishan Negi

Tragedy Classics Thriller

सुन ए जिंदगी

सुन ए जिंदगी

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कोई गिला नहीं कोई शिकवा भी नहीं 

मगर कुछ सवाल अभी बाक़ी हैं

जिनका जवाब चाहिए तुझसे ए ज़िन्दगी 

बस तुझसे मिलने का बहाना ढूँढ़ रहा हूँ


चलते चलते बहुत मुसाफिर मिले

कोई अपना तो कोई पराया मिला

मिला नहीं मगर कोई तुझसा ए जिंदगी

सफर में तुझसा कोई दीवाना ढूँढ रहा हूँ


दिल में सजा कर रखे हैं अब तलक

दर्द जो मिले थे तुझसे विरासत में

वही वक़्त फिर से लौटा दे ए ज़िन्दगी 

तेरे साथ गुजरा वह ज़माना ढूँढ़ रहा हूँ 

 

बेशक तुझे याद न हो मुझे याद है

मेरी बदनसीबी पर तेरा वह मुस्कुराना

तेरी गुस्ताखियाँ भुला नहीं ए ज़िन्दगी 

तेरे भीगे लबों पर वही तराना ढूँढ रहा हूँ 


चलते चलते पांव अब दुखने लगे हैं

दिल के गहरे ज़ख्म किसको दिखाऊँ

मिट जाएँ सारे ग़म जिधर ए ज़िन्दगी 

रात के अंधियारे में वह मैखाना ढूँढ रहा हूं।


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