STORYMIRROR

Sakshi Mutha

Romance

4  

Sakshi Mutha

Romance

सुकून का जरिया थी तुम

सुकून का जरिया थी तुम

1 min
442

इस उलजी सी जिंदगी मे 

सुकून का जरिया थी तुम


कभी मुस्कुराती कभी खिलखिलाती

मस्त पवन का झोंका थी तुम


तुम थी तो मुझसे अलग

पर मेरे जीने की वजह थी तुम


हर जज्बात में, हर अरमान में

मेरा हर किस्सा तुझसे था


मेरी कहानी थी तुम

आईने में जब भी देखा 


मेरे अक्श में शामिल थी तुम

बीते हर लम्हों की


एक मीठी सी दास्ताँ थी तुम

इस उलझी सी जिंदगी में 

सुकून का जरिया थी तुम।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Sakshi Mutha

माँ

माँ

1 min पढ़ें

पापा

पापा

1 min पढ़ें

दोस्त

दोस्त

1 min पढ़ें

पापा

पापा

1 min पढ़ें

साथ

साथ

1 min पढ़ें

यादें

यादें

1 min पढ़ें

मजहब

मजहब

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Romance