सशक्तिकरण
सशक्तिकरण
आज कॉलेज में एक भले व्यक्ति से मुलाकात हुई
उसने कहा कि हम महिलाओं को अब महिला सशक्तिकरण अपनाना है
फिर इस विषय दिन भर पर खूब चर्चा हुई
पर आखिर महिला सशक्तिकरण का क्या अभिप्राय है यह मैने अब तक ठीक से न जाना है
घर लौटते यही सोच मन में थी कि इतने में कंडक्टर की पुकार हुई
सोचा छोड़ो यह सब अगले स्टॉप पर उतर कर अब घर ही आजाना है
घर में घुसते ही दादी की आवाज़ हुई
आजा बेटी पानी पी ले फिर माँ का हाथ बटाना है
आखिर शादी लायक हो गई हो तुम अब एक नया परिवार भी तो बसाना है
मन की दुविधा छोड़ कर कुछ शरमाई कुछ सकुचाई
अब लगा चलो एक नया सपना सजाना है
शादी कर के अब पिया के घर जाना है
शादी कर एक नया परिवार बनाने की तैयारी हुई
फिर सोचा पढ़ी लिखी बहु हूँ
मुझे अपना करियर भी तो बनाना है
अब फिर वो कालेज की बात याद हो आई
हर महिला को महिला सशक्तिकरण अपनाना है
कुछ समय बीता और परिवार में कुछ ऐसी खो गई
अब बस एक ही सोच थी कि घर की और बच्चों की जिम्मेदारी को निभाना है
सपने की कब सोचूँ अब तो निद्रा से ही विरह हो गई
बस एक ख़्याल में रात बिताती हूं कि कल टिफिन में क्या बनाना है
सुबह सुबह की भागदौड़ में जैसे तैसे स्कूल पहुंच गई
कक्षा में प्रवेश करते ही सोचा
शिक्षिका हूँ मुझे तो देश का भविष्य बनाना है
इन छात्रों पर जान लगा दूं
सच्ची मेहनत से अब बस इन्हें पढ़ाना है
जाने कैसे दिन बीता सुबह से जाने कब दोपहर हो गई
अब ये सोच थी कि समय से घर जाऊं अब
बहुत थक गई अब जाकर इस थकान को दूर भगाना है
घर पहुंची तो सोचा पल दो पल सो जाती हूँ
पर माँ जी की आवाज़ आई सुबह से लेकर बैठी हूं
अब सम्भालो अपने बच्चों को मुझे तो कीर्तन पर जाना है
निद्रा देवी को दूर से ही प्रणाम किया
क्यों कि अब बच्चों के साथ समय बिताना है
कभी खाना बनाना, कभी होमवर्क कराना
कभी मंदिर में ज्योत जलाना है
घड़ी तो जैसे मुझे देख और तेज दौड़ने लग गई
बस इसी तरह हर दिन से रात और रात से दिन हो जाना है
माँ दुर्गा सा अष्टभुजी रूप निभाते थक गई
अब बस दो भुजाओं से जीवन बिताना है
लगता है महिला सशक्तिकरण का भेद अब मै समझने लग गई
मुझे सबला न करो अबला ही रहने दो अगर इस सशक्तिकरण का अर्थ दोगुना बोझ बढ़ाना है
अगर इस सशक्तिकरण का अर्थ दोगुना बोझ बढ़ाना है
-- रुचि छाबड़ा
