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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Drama Romance

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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Drama Romance

संगम

संगम

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बन गई तू इश्क की नदी, मै बन गया हूंँ गहरा समंदर,
एक दुजे के इश्क में हम डूबकर, आज हो गया संगम।

तेरी मधुर मुस्कान देख के, खिल गया मेरा पागल मन,
तेरी सांँस मेरी सांँस से मिलकर, आज हो गया संगम।

तुझसे नज़र मिलाकर, मेरे दिल का दूर हो गया है ग़म,
दिल की धड़कन तेज़ बनी और, हो गया आज संगम।

 तेरा बेसुमार हूस्न देखकर, लहरा गया मेरा रोम रोम,
 भान शान मै भूल ही गया और हो गया आज संगम।

मेरी दीवानगी की असर से, रुकने लगा है बहता पवन, दिल में इश्क का शोर मचा और, हो गया आज संगम।

तुने मुझे आलिंगन दिया और आ गई सूरज को शरम,
जा कर छूप गया बादल में और, हो गया आज संगम।

'मुरली' यूंँ रहे सदा साथ मेरे, यही है खुदा से मेरी अर्ज, खुदा ने एसा करिश्मा किया और, हो गया आज संगम।

रचना:-धनजीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात)


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