STORYMIRROR

Dhanjibhai gadhiya "murali"

Drama Romance

4  

Dhanjibhai gadhiya "murali"

Drama Romance

मौन की भाषा

मौन की भाषा

1 min
0

लब हिलाए बिना भी बात हुई,
मौन ही अब हमारी ज़ात हुई। ​

शब्द सब ख़ामोश हो गए सारे,
नज़रों-नज़रों में बात-चीत हुई। ​

तुमने देखा जो एक बार हँस कर,
दिल में अरमानों की बरसात हुई। ​

शोर दुनिया का बह गया सारा,
सन्नाटों में ही नई शुरुआत हुई। ​

इश्क़ कहते हैं उसे दुनिया वाले,
आँखों ही आँखों में सौग़ात हुई। ​

अनकहे लफ़्ज़ बन गए तराने,
जब तेरी इनायत मुझ पर हुई। ​

सुनके ख़ामोशियाँ तेरी 'मुरली',
ज़िंदगी से फिर मुलाक़ात हुई।

 रचना:-धनजीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात)


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama