मित्रता
मित्रता
निःस्वार्थ प्रेम की मिसाल होती है मित्रता,
अंधेरे में उजाला करती है सच्ची मित्रता।
दुखों के समय में सहारा बनती है मित्रता,
भटके हुए राही का गाँव बनती है मित्रता।
न रंग देखती है, न देखती है जात मित्रता,
सुदामा और श्री कृष्ण जैसी होती है मित्रता।
बिना कहे बात समझ ले उसे कहते है मित्रता,
हर मुश्किल में जो हाथ थाम ले वही है मित्रता।
ज़िंदगी की सबसे बड़ी दौलत बनती है मित्रता,
हर रोग का बेहतरीन इलाज करता है मित्रता।
दुनिया का सब से वफ़ादार रिश्ता है मित्रता,
ज़मीं पर ख़ुदा का भेजा फ़रिश्ता है मित्रता।
'मुरली' कुरुक्षेत्र के युद्ध में अर्जुन का बने सारथी,
यही है अर्जुन और श्री भगवान कृष्ण की मित्रता।
रचना:- धनजीभाई गढीया "मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात)
