अपराध
अपराध
दिल में छूपा हुआ एक छोटा सा अपराध है,
हंसते हुए चेहरे पर भी गज़ब का विवाद है।
सच कहना मुश्किल बन गया है आजकल,
जूठ के राह पर चलते रहना भी अपराध है।
आईना रोज पुछता है, मुझे नजर मिलाकर,
खुद को भूल जाना यह भी एक अपराध है।
रिश्ते अब टूट गए है स्वार्थ की इस आग में,
प्रेम को शर्तो से जोड़ने का भी अपराध है।
वक्त तो माफ करता रहा है गलती हो मगर,
दिल में पछतावा होना यह बड़ा अपराध है।
'मुरली' कलम उठाई तो आ गया है समझ में,
मौन रहकर जुल्म सहते रहना भी अपराध है।
रचना:-धनजीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात)
