संगम दिलों का
संगम दिलों का
संगम दिलों का महज़ इत्तफाकन नहीं होता !
नज़रों के मिलने के साथ ही दो दिल भी मिलते हैं !
हौले-हौले समझते हैं एक दूजे की पसंद न पसंद!
समझदारी के परिचय से थोड़ा-थोड़ा खुद को बदलते हैं !
प्रेम विश्वास की डोर से बँधते हैं जब दो मन !
सम्मान को ठेस न पहुँचे इसका भी ख्याल रखते हैं !
रिश्तों की नज़ाकत को समझते हैं इस कद्र !
मिलन हो या जुदाई फिर भी दिल मे समर्पण रखते हैं !

