STORYMIRROR

कीर्ति वर्मा

Romance

4  

कीर्ति वर्मा

Romance

सम्मोहन

सम्मोहन

1 min
246


तुम पूनम के इंदु से

मैं तो एक चकोर हूं।


तुम स्वाति की बूंद से

मै चातक सी प्यासी हूं।


तुम संदल के तरु प्रिय

मैं अमरलता सी दासी हूं।  


जाने क्या सम्मोहन है तुझमे?

मैं खिंची डोर सी आती हूँ।


अब और न देर लगा कान्हा

मैं तेरे चरणों की दासी हूं।

         


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance