STORYMIRROR

कीर्ति वर्मा

Classics Inspirational

4  

कीर्ति वर्मा

Classics Inspirational

इंद्रधनुष

इंद्रधनुष

1 min
203

मैंने अपने आँगन में 

कुछ विरवे रोपे थे 

खाद पानी से सींचा 

और बहुत दुलराया

और एक


दिन चटकी कलियां

फूल और फल भी आये 

संग साथ में तितली लाये

रंग कई बिखराये।


गौरैया और छोटी चिड़िया

नृत्य गान करती है,

और गिलहरी आंगन में 

झूम झूम नचती है,


सूने निर्जन आँगन में 

रंग समाए सातों ऐसे

आसमान का इंद्रधनुष 

घर मेरे आया हो जैसे!!

क्यों कहते रहते हो ?


अब समय है बदला

और नीरस है जीवन

तुम भी तो कुछ विरवे रोपो

अपने मन के आँगन।   


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics