Hurry up! before its gone. Grab the BESTSELLERS now.
Hurry up! before its gone. Grab the BESTSELLERS now.

Sanjay Kumar Jain Pathik

Romance Tragedy Classics


5.0  

Sanjay Kumar Jain Pathik

Romance Tragedy Classics


एक दिन मैं नहीं लौटूंगा

एक दिन मैं नहीं लौटूंगा

1 min 317 1 min 317

एक दिन मैं नहीं लौटूंगा,

रोज़ की तरह,

तुम मेरा इंतज़ार करोगी,

मेरी फीकी चाय और अपने 

चुप गुस्से के साथ, फिर 

झुंझलाकर मुझे फोन करना चाहोगी 


'तुम लेट आते हो तो मेरा जी 

अटका रहता है'

पर तुम फोन भी नहीं करोगी 

तुम्हें याद आ जायेगी हमारी तुम्हारी अनबन 

फिर भी तुम इंतज़ार करोगी 

क्योंकि तुम्हें मेरी परवाह है 


पर कभी तो एसा होगा 

जब मैं नहीं लौटूंगा

सिर्फ मेरी खबर आयेगी 

तब तुम शायद मुझे सुनना चाहोगी

यह सोचकर कि मैं आस पास हूँ 


मैं तुम्हें छोड़कर कैसे जा सकता हूँ 

पर कभी तो एसा होगा 

एक दिन मैं नहीं लौटूंगा।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Sanjay Kumar Jain Pathik

Similar hindi poem from Romance