R Rajat Verma
Tragedy
उसने बढ़ाए हाथ,
मैंने सिक्का थमा दिया।
क्या यही है इंसानियत,
तो मैंने निभा लिया।
मुद्दत से तेर...
नव दुर्गा - स...
पराए घर
मां
इंतज़ार
बादल
चेहरे पर चेहर...
दोस्त
बड़ी बहन
इश्क़ का दरिय...
बादलों को फर्क ना पड़े, किसका भीग रहा आसमान, बादलों को फर्क ना पड़े, किसका भीग रहा आसमान,
नशा ना करना तुम यारो,सब कहते बड़ी बीमारी हैl नशा ना करना तुम यारो,सब कहते बड़ी बीमारी हैl
ये ज़िम्मेदरियाँ मुझे सोने नहीं देती। ये ज़िम्मेदरियाँ मुझे सोने नहीं देती।
बहुत सालों बाद आज टीवी पर समाचार का चैनल लगाया। बहुत सालों बाद आज टीवी पर समाचार का चैनल लगाया।
मौन की थाली सजाकर ज्योति आत्मा की जगाऊँ मौन की थाली सजाकर ज्योति आत्मा की जगाऊँ
जिंदा रहे हमारा शरीर रूपी घर ऐसे मिटा दो, समाज से सब निशाचर जिंदा रहे हमारा शरीर रूपी घर ऐसे मिटा दो, समाज से सब निशाचर
बधाई हो एक और गणतंत्र दिवस निकल गया। बधाई हो एक और गणतंत्र दिवस निकल गया।
जिनके पास ओढ़ने को नीलांबर और बिछाने को धरा के सिवा कुछ भी तो नहीं है। जिनके पास ओढ़ने को नीलांबर और बिछाने को धरा के सिवा कुछ भी तो नहीं है।
जन हित, लोक कल्याण की दुहाई दी जाएगी, कुछ मुफ्त सामग्री देकर भावनाएं खरीदीं जायेंगीं। जन हित, लोक कल्याण की दुहाई दी जाएगी, कुछ मुफ्त सामग्री देकर भावनाएं खरीदीं ज...
चुनाव का मौसम आते गरीब के हित का, मचता है बड़े ही जोर का शोर। चुनाव का मौसम आते गरीब के हित का, मचता है बड़े ही जोर का शोर।
खुदा तूने भी सितम हमको बे-सबब दे दिया है।। खुदा तूने भी सितम हमको बे-सबब दे दिया है।।
नसीब में नहीं था एक मुकम्मल जहान पैरों तले जमीन और सिर पर आसमान। नसीब में नहीं था एक मुकम्मल जहान पैरों तले जमीन और सिर पर आसमान।
मैं जानता हूँ मेरे अधिकार मुझे मिलने चाहिए! मैं जानता हूँ मेरे अधिकार मुझे मिलने चाहिए!
बड़ी ज़ोर की हवा चली है आज, रास्तों पर इतनी तेज़ हवा में चलना। बड़ी ज़ोर की हवा चली है आज, रास्तों पर इतनी तेज़ हवा में चलना।
सज़ा ए सुख की हकदार को दमन कर दासी बनाए जाते हो, सज़ा ए सुख की हकदार को दमन कर दासी बनाए जाते हो,
सड़कों पर देश जा उभरता लहू उबल रहा , या बह रहा है. सड़कों पर देश जा उभरता लहू उबल रहा , या बह रहा है.
डर के ताले जिनके पीछे कैद हैं विश्वास और निश्चिंतता। डर के ताले जिनके पीछे कैद हैं विश्वास और निश्चिंतता।
अनेकता में एकता इसकी पहचान, और समानता ही बनें इसका मंत्र। अनेकता में एकता इसकी पहचान, और समानता ही बनें इसका मंत्र।
कड़कड़ाती ठंड में छाया सघन कोहरा, ठंड इतनी फूलों पर भी ना मंडराया भौंरा। कड़कड़ाती ठंड में छाया सघन कोहरा, ठंड इतनी फूलों पर भी ना मंडराया भौंरा।
जिन आँखों से ज्योति नहीं, उनका तो संसार अधूरा। जिन आँखों से ज्योति नहीं, उनका तो संसार अधूरा।