R Rajat Verma
Tragedy
उसने बढ़ाए हाथ,
मैंने सिक्का थमा दिया।
क्या यही है इंसानियत,
तो मैंने निभा लिया।
मुद्दत से तेर...
नव दुर्गा - स...
पराए घर
मां
इंतज़ार
बादल
चेहरे पर चेहर...
दोस्त
बड़ी बहन
इश्क़ का दरिय...
आधुनिक युग में सच्चाई ढूंढने से भी दिखाई नहीं देती है। आधुनिक युग में सच्चाई ढूंढने से भी दिखाई नहीं देती है।
सच बिक गया हैं किसी शह के माफिक यहाँ सबने झूठ के दाम लगा रखे हैं। सच बिक गया हैं किसी शह के माफिक यहाँ सबने झूठ के दाम लगा रखे हैं।
भले ही वह मेरे ना हो सके, मगर जिसके हाथ थामेंगे.... वह खुशनसीब तो जरूर होगा भले ही वह मेरे ना हो सके, मगर जिसके हाथ थामेंगे.... वह खुशनसीब तो जरूर होग...
जीना हो गया है कठिन फिर भी अंत तक वक्त का इंतजार। जीना हो गया है कठिन फिर भी अंत तक वक्त का इंतजार।
तीव्र बाणों से बेधित पर मेरे पर न फूटी आह प्राणों से वेदनायें किसको पुकारती समझे कौन। तीव्र बाणों से बेधित पर मेरे पर न फूटी आह प्राणों से वेदनायें किसको पुकारत...
अँखियों के अँखियों से लड़ने से लहक उठी जैसी चिंगारी अँखियों के अँखियों से लड़ने से लहक उठी जैसी चिंगारी
मेरी माँ सम कहीं न कोई। नेक संस्कार हममें बोई।। मेरी माँ सम कहीं न कोई। नेक संस्कार हममें बोई।।
तमाम झंझावातों में ईश्वर भी देता उन जुझारुओं का साथ। तमाम झंझावातों में ईश्वर भी देता उन जुझारुओं का साथ।
बीच सफर में रहगुज़र ने भी, कितने अलग मंजर दिखाए हैं ! बीच सफर में रहगुज़र ने भी, कितने अलग मंजर दिखाए हैं !
हर शाम वापिस लौट आती हैं बेचैन निगाहें : जिंदगी पहले नाखुश थी, अब बहुत उदास है ! हर शाम वापिस लौट आती हैं बेचैन निगाहें : जिंदगी पहले नाखुश थी, अब बहुत उदास ह...
चंद रोज़ से दिल बड़ा परेशान है क्या यह मोहब्बत की निशानी है। चंद रोज़ से दिल बड़ा परेशान है क्या यह मोहब्बत की निशानी है।
गुजरा था साथ तुम्हारे, कभी गली-चौबारे सब बेजान हुई। गुजरा था साथ तुम्हारे, कभी गली-चौबारे सब बेजान हुई।
नर मादा घोंघिल बाँट बराबर दायित्वों को जी लेते समानता पूर्वक जीवन। नर मादा घोंघिल बाँट बराबर दायित्वों को जी लेते समानता पूर्वक जीवन।
दूजों के दोष निहारते हर क्षण करके दोनों नयनों में विस्तार दूजों के दोष निहारते हर क्षण करके दोनों नयनों में विस्तार
देखते ही देखते स्वदेशी के पैरोकार बन जाते हैं आम समाज के नवाब। देखते ही देखते स्वदेशी के पैरोकार बन जाते हैं आम समाज के नवाब।
इतने बरसों से देख रहे हम सब वैसा का वैसा ही है इतने बरसों से देख रहे हम सब वैसा का वैसा ही है
जब तकदीर पर आँसू बहाना ही है तो अपने हाथों से कुछ बनाकर करोगे ही क्या। जब तकदीर पर आँसू बहाना ही है तो अपने हाथों से कुछ बनाकर करोगे ही क्या।
तेरे रूठने का सिलसिला कुछ ज्यादा हीं बढ़ गया है लगता है मुझे दिल का किराया बढ़ाना होगा। तेरे रूठने का सिलसिला कुछ ज्यादा हीं बढ़ गया है लगता है मुझे दिल का किराया बढ़...
कई मज़बूर लोगों को भी... लगभग प्रतिदिन आवश्यकता है ! कई मज़बूर लोगों को भी... लगभग प्रतिदिन आवश्यकता है !
खुद से कहती मन में रोती नीर भरे नयनों से न जाने। खुद से कहती मन में रोती नीर भरे नयनों से न जाने।