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Chandan Kumar

Tragedy

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Chandan Kumar

Tragedy

सीमा के उस पार

सीमा के उस पार

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"सीमा के उस पार"

 सरहद के सीने पर फिर घाव दिखाए जाते हैं
 तूफ़ानों को दोनों ओर झंडे लहराए जाते हैं।
गोली की बोली में जब संवाद सिमट जाता है,
 तब युद्ध नहीं, इंसान ही सबसे पहले मर जाता है।

 धरती दोनों ओर एक-सी, आसमान भी साझा है,
फिर क्यों हर पीढ़ी को बस बारूद ही बाजा है?
 सैनिक जो सीमा पर लहू से इबारत लिखते हैं
 क्या वो भी नहीं चाहते कि बच्चे घर में दिखते हैं?

 हर बंकर के पीछे कोई माँ की दुआ रोती है,
 हर हमले से पहले एक उम्मीद खोती है।
क़ब्रें इधर भी खुदती हैं, उधर भी सूनी राखें हैं,
फिर क्यों हम भूल जाते हैं कि ये दोनों ही राहें हैं?

 वो रात कब आएगी जब हथियार सो जाएंगे,
जब भारत और पाकिस्तान, भाई-से हो जाएंगे।
 जब रणभूमि की जगह कविता की भूमि होगी,
और बंदूक नहीं, बस शांति की गूँज होगी। 


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