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Vijay Kumar parashar "साखी"

Drama Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Drama Inspirational

"शूल"

"शूल"

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शूल ही करते है, खूबसूरत फूलों का श्रृंगार

शूल ही करते है, इन फूलों से सच्चा प्यार

गर न होते फूलों के पास शूल एक भी यार

फिर कौन करता, फूलों की सुरक्षा स्वीकार


शूलों की बदौलत, फूलों की बागों में है, बहार

सच मे देखे तो, शूलों को करो, सब नमस्कार

ऐसे शूल जैसी कड़वी दवा करती, चमत्कार

फिर भी हम चुभते ही, शूल देते इन्हें, धिक्कार


कड़वी वाणी शूल जैसे चुभता हुआ, व्यवहार

जो इसे सुनकर अपने जीवन में देते है, उतार

सच कह रहा हूं, वो जीवन बनता है, गुलजार

शूल भी जीवन की कठिनाइयों का है, विचार


शूलों से घबराओ मत, इनसे करते रहो, प्यार

वो दिन दूर नही, फैलोगे बनकर, सुगंधित, बयार

बगैर शूलों के, फूलों का जीवन है, एकदम बेकार

शूल ही करते है, इन खूबसूरत फूलों का श्रृंगार।


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