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Vijay Kumar parashar "साखी"

Tragedy

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Tragedy

दिलों जल रही अगन

दिलों जल रही अगन

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आज लोगों के दिलों में जल रही,अगन

महंगाई बनकर आ गई,मुफ्त में दुल्हन

प्रधानमंत्री मोदीजी ने भी किया,निवेदन

आवश्यक हो तो ही काम ले,संसाधन


विदेशी मुद्रा भंडार बचाओ हिन्द जन

जब तक न आये लग्न न खरीदो कुंदन

सोने से जुड़े हुए जो कर्मचारी है,निर्धन

सरकार,उन्हें जरूर दे गुजारे योग्य वेतन


अमेरिका-ईरान युद्ध की चल रही,पवन

यह पूरे विश्व का जला रही,मनु उपवन

इस युद्घ के धुंए से आंखे कर रही,रुदन

इससे रुक सी गई कई देशों की धड़कन


पश्चिमी एशिया संकट से टूटा सबका मन

पेट्रोल,गैस आदि की महंगाई छू रही,गगन

यूएई,सऊदी अरब आदि का लूटा अमन

होरमुज बंद होने से बाधित,ऊर्जा संसाधन


अमेरिका-इजराइल-ईरान मध्य मुख्य रण

ये मिटा रहे पूरे विश्व की शांति को जबरन

अमेरिका की दादागिरी से टूटा शांति स्वप्न

साथ ईरान की चोट से फूटा महंगाई बम


सम्पूर्ण विश्व का त्राहि-त्राहि कर रहा,जन

इस युद्ध ने निर्धन का कर ही दिया,निधन

आज ट्रम्प महोदय का चीन का है,भ्रमण

ईश्वर की दया हो,मिले हल का कोई सुमन


पर लगता नहीं दोनों बंधे अहंकार के बंधन

अब उम्मीद,होगा जब ब्रिक्स देश सम्मेलन 

उसमें हिंद निकालेगा,कोई मार्ग बिना चुभन

जिससे मिटेगा वैश्विक अर्थव्यवस्था असंतुलन


प्रधानमंत्री मोदीजी की सुनो सब सोच नूतन

हरित ऊर्जा से ही होगा पूरे विश्व मे परिवर्तन

सोर ऊर्जा को अधिक काम ले,सब ही सज्जन

त्याग दे सब घमंडी मन,बने सौम्य सब ही वतन


खुद भी बने चंदन,ओर बाहर भी उगाये चंदन

फिर देखना,क्यों न महकेगा विश्व का उपवन

आज की युद्ध अगन,का एक ही उपाय चेतन

विश्व बंधुत्व व भाईचारे से मिटेगी,जलन-अगन

दिल से विजय

विजय कुमार पाराशर-"साखी"



  



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