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Vijay Kumar parashar "साखी"

Drama Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Drama Inspirational

"साईकिल मितव्ययी उपकरण"

"साईकिल मितव्ययी उपकरण"

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नही फैलाती है,वो तो ज़रा सा भी प्रदूषण वर्तमान का वो सबसे मितव्ययी उपकरण साईकिल कहते है,उसको सब ही सज्जन
इसने ही सुगम किया था,कभी आवागमन वर्तमान में आ गये,कई सारे आवागमन साधन बाइक,स्कूटी की बहुत तेजी से चल रही पवन पर महंगाई ने कर दिया बहुत मुश्किल जीवन
ये दुपहिया वाहन,बढ़ा रहे,महंगाई व प्रदूषण पेट्रोल,डीजल के दाम लगा रहे आग,गगन
बहुत महंगा हो चुका,बाइक,स्कूटी का ईंधन इनसे बहुत उत्तम है,साइकिल से आवागमन नियमित साइकिलिंग से स्वस्थ रहता है,तन
 साथ ही न किसी सौर,न किसी धुंए की घुटन साईकिल चलाने से शुद्ध रहता है,पर्यावरण कभी ये हुआ,करती थी,युवाओं की धड़कन
पर वक्त बदला,कम हुआ साईकिल का चलन वक्त एकबार पुनः सबका आता मनुष्य जीवन महंगाई ने याद दिलाई,साईकिल सुख सज्जन साईकिल से बढ़कर नही कोई उत्तम साधन साईकिल चलाओ,महंगाई मिटाओ,बिना धन विश्व साईकिल दिवस मुबारक हो,बिना रुदन साईकिल ही भूत,वर्तमान की याद एक सुखद आगे भी जिंदा रहेगी,परिवर्तित साईकिल नूतन ये में नही उपयोगिता कहती है,वस्तु की सघन दिल से विजय
विजय कुमार पाराशर-"साखी"


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