शुक्रिया
शुक्रिया
मैं चाहूं भी तो अल्फाजों से न मिल पाऊं
इस ज़र्रे को खुद से बिछड़ता देख पाऊं
अगर न देख पाया इन बारिशों को
तो इन फिसलती बूंदों को तुमसे बिछड़ता देख पाऊं
अगर देख पाया इन बूंदों को तुम्हारे नजदीक आते
तो लड़ते लड़ते उनसे खफा हो जाऊँ
तुमसे मिल के
अपनी मुहब्बत का शुक्रिया अदा कर पाऊं

