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Harshel Behl

Abstract Drama

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Harshel Behl

Abstract Drama

चहरे

चहरे

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कुछ तो हैं राज़

छुपाते सारे चहरे


कहना चाहे फिर भी 

थम जाते ये चहरे


सब करते अपने मन की

लेकिन जुदा न कर पाते ये अंधेरे


और जब आती है बात दिल की

तो हँसी का मुखौटा लगाए

चुप हो जाते ये चेहरे।


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