कभी कभी
कभी कभी
कभी कभी मन करता है
नहाते नहाते थोड़ा रो लूँ
ताकि आंसू भी पानी के साथ बह जाए
हजारों आसमानों के वादे
दस दुनियाओं के गम से टूट गए
चल्ले की राह अब जब गुम ही गई है
तो सौ रंगो के दस्तखत पाने की क्या जरूरत
लाल धुआं इस मोह माया को ढक चुका है
अब तो जमीन में बस एक फूल बन के रह जाना है।
