तुम्हारा नाम
तुम्हारा नाम
जाने क्यों उसको जानता हूँ
शायद उसको अपना
पिछले जन्मों से मानता हूँ
याद करके भी याद नहीं वो कौन है
शायद किसी सफर में मिले थे
पर आज वो सफर भी मौन है
किसी की तो ये तकदीर अपने
हाथों में लेके चला इस शाम
जानता हूँ मैं उसे,
फिर भी जब मैं उसे देखा तो
मैंने पूछा "तुम्हारा नाम ?"

