शरमा गया आलम
शरमा गया आलम
संगीत की सरगम से महकता है आलम,
धडकन के ताल से नाच रहा है ये आलम।
दुकूल सी चुनरिया सनम ओढकर आई,
उसके आगमन से आज रंगीन बना आलम।
मलय बयार आई तो उड़ने लगी चुनरिया,
उसको देखकर मदहोंशी में डूब गया आलम।
उसके अविरल इशारा से पिघला मेरा दिल,
मेरा दीवानापन देखकर मुस्कुरा गया आलम।
नफ़रत का जमा हुआ धूमिल बिखरने लगा,
प्यार की शहनाई आज बजाने लगा आलम।
दौड़कर सनम की बांहों में सिमट गया "मुरली",
बरसी प्यार की बारिश, शरमा गया आलम।
रचना:-धनजीभाई गढीया"मुरली"(ज़ुनागढ-गुजरात)

