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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Tragedy Thriller

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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Tragedy Thriller

लाचारी

लाचारी

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अज़ीब सी है ये मेरे मन की लाचारी,
मंज़िल भी सामने है मगर रास्तें है भारी।

हर मोड़ पे ख्वाबों ने पुकारा है मुझको,
लेकिन पैरो में बंधी है जंजीरों की लाचारी।

दिल चाहता है आसमान की उड़ान करुं,
लेकिन रोक रही है मुझे हवाओं की लाचारी।

मन में बहुत भरे है खुशियों के अरमान,
लेकिन हर कदम पर है उज़ालें की लाचारी।

दिल से चाहता हूंँ कि बदल दूं अब ये मुक़द्दर,
लेकिन हर कदम पर आगे है वक्त की लाचारी।

"मुरली" को इंतजार है खुदा की कयामत का,
आ कर चाह बढा दे और हटा दे मेरी लाचारी,

 रचना:-धनजीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात) 


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