STORYMIRROR

D.N. Jha

Tragedy

3  

D.N. Jha

Tragedy

बिखर रहे परिवार

बिखर रहे परिवार

1 min
113

पश्चिम की करके नकल,बिखर रहे परिवार।

अपनी धुन में है सभी,भरा पड़ा अखबार।।


बिखर रहे परिवार सब, चिंता की है बात।

मिलजुल रहते थे सदा,कभी तात के तात।।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy