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D.N. Jha

Tragedy

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D.N. Jha

Tragedy

बिखर रहे परिवार

बिखर रहे परिवार

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पश्चिम की करके नकल,बिखर रहे परिवार।

अपनी धुन में है सभी,भरा पड़ा अखबार।।


बिखर रहे परिवार सब, चिंता की है बात।

मिलजुल रहते थे सदा,कभी तात के तात।।



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