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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Romance Tragedy

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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Romance Tragedy

प्यार का ज़ख्म

प्यार का ज़ख्म

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दिल के ज़ख़्मों को सब से छुपा कर रो रहा हूंँ,
तेरी याद की गहराई में डूबकर आज रो रहा हूंँ।

सारी जिंदगी विरह का साया रहा है साथ मेरे,
दिल में मिलन की आग से मै खाक हो रहा हूंँ। ​

बहुत इंतज़ार किया तू न आई मुझको मिलने,
इस सुनसान घर में अकेला बनकर रो रहा हूंँ। ​

प्यार की लहराती बसंत के ख्वाब देखे थे मैने,
अब पतझड़ सी जिंदगी बिताकर मै रो रहा हूंँ। ​

कभी तेरी आंखों में प्यार का अश्क भी न देखा,
आज तन्हाई की ज्वाला में जलकर रो रहा हूंँ।

 तेरे मिलन की आरजू अब टूटने लगी है लेकिन,
तुझको कायम भूल जाने के लिये मै रो रहा हूंँ।

 तू मुझे कहती थी कि हम जिंदगीभर न बिछडेंगे,
आज तेरी असलियत पहचानकर मै रो रहा हूंँ।

 अब तुझे फिर मिलने की तमन्ना न रही दिल में,
"मुरली" तेरे फरेबी प्यार को देखकर रो रहा हूंँ।

 रचना:-धनजीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात)


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