STORYMIRROR

Navneet Goswamy

Romance Tragedy

3  

Navneet Goswamy

Romance Tragedy

तेरे निशां

तेरे निशां

1 min
153

 रेशम के मेज पोशों पर परोसी ये एक एक चीज

तुम्हारे यहां होने का एहसास दिलाती है मुझको

मोहब्बत में मेरी भी रही होगी इतनी तो कशिश

कि किसी शै में हम भी नजर आते होंगे तुझको


ये आधा छूटा रोटी का टुकड़ा

और ये जो पैमाने में, आधी पी, आधी छोड़ी तुमने

सब शख़्सियत बयां करते है तुम्हारी

सोचती हूं तारूफ क्यों किया तुमसे हमने

इनकी तरह, हमको भी तो राह में छोड़ा तुमने ।


बस इक तुम ही नहीं , मिले मुझको,

और अब

जाती हूं जहां भी, तेरे निशां मिलते है


                   


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance