Antariksha Saha
Tragedy
हम गरीब है इसका एहसास था
पढ़ यकीन तब आया जब vip लाइन के चलते
भगवान के मंदिर मे भी हमें रोक लिया गया
अमीर के पैसे से चलने वाले मंदिर मे
ऐसा लग रहा था की हमारे नहीं
अमीरों के भगवान रहते हो।
मूरत
घाव कुछ गहरे ...
ख़ामोशी
मजदूर
झूठी मुस्कान
लक्ष्य
फ़ोन नंबर
मीठी चासनी
घर
angrayian
इंसा हो इंसा ही बने रहो, नियति तूने सबक सिखाया। इंसा हो इंसा ही बने रहो, नियति तूने सबक सिखाया।
जिसे प्रेम कहूँ या चाहत- सोचो कैसे उर क्या नाम दूं तेरा। जिसे प्रेम कहूँ या चाहत- सोचो कैसे उर क्या नाम दूं तेरा।
अपने हालात का और फ़िर कभी देखा भी नहीं पलट कर अपने हालात का और फ़िर कभी देखा भी नहीं पलट कर
मैं हूं नदी, कहूं आत्मकथा भ्राता। मैं हूं नदी, कहूं आत्मकथा भ्राता।
लगकर गले चल रही हैं ऐसे मानों अपना ही घर समझा है मुझे। लगकर गले चल रही हैं ऐसे मानों अपना ही घर समझा है मुझे।
प्रलयंकारी रूप धरूँगी, बनूँगी तेरा काल। प्रलयंकारी रूप धरूँगी, बनूँगी तेरा काल।
जहाँ हम बसायें धवल चाँदनी में सपन क्यों हमें ये सजाना न आया। जहाँ हम बसायें धवल चाँदनी में सपन क्यों हमें ये सजाना न आया।
पता नहीं क्यों अब मगर, होने लगा है अचानक तन्हाई का सा एहसास ! पता नहीं क्यों अब मगर, होने लगा है अचानक तन्हाई का सा एहसास !
क्योंकि बूढ़ा बैल कहीं बिकता नहीं इसमें भला किसान का क्या दोष ? क्योंकि बूढ़ा बैल कहीं बिकता नहीं इसमें भला किसान का क्या दोष ?
भाई को ही अपने भाई से अब होने लगा है द्वेष भाई को ही अपने भाई से अब होने लगा है द्वेष
लोग क्यों परदेस बसते, एक रोटी के लिए। लोग क्यों परदेस बसते, एक रोटी के लिए।
कम अक्ल बिगड़ी शक्ल, व्यायाम का, देश निकाला। कम अक्ल बिगड़ी शक्ल, व्यायाम का, देश निकाला।
क्या इसीलिए ? बीच राह छोड़ गए क्यों बिना कुछ कहे ? क्या इसीलिए ? बीच राह छोड़ गए क्यों बिना कुछ कहे ?
अपने मन की इच्छाओं को हमेशा दबाती रही कुछ इस तरह औरत जीती रही। अपने मन की इच्छाओं को हमेशा दबाती रही कुछ इस तरह औरत जीती रही।
सोचो अब तो हुक्मरानों दिल्ली दहलाने वाली है। सोचो अब तो हुक्मरानों दिल्ली दहलाने वाली है।
मैं नदी हूँ तुम्हारी माँ जैसी हूँ सब कुछ सह चुप रहती हूँ। मैं नदी हूँ तुम्हारी माँ जैसी हूँ सब कुछ सह चुप रहती हूँ।
अगर अभी भी न समझे तो मनुष्य का अस्तित्व रह जाएगा हिलकर। अगर अभी भी न समझे तो मनुष्य का अस्तित्व रह जाएगा हिलकर।
सहेजा अपने अंतर्मन तक कागजी दुनिया में सहेजा नहीं। सहेजा अपने अंतर्मन तक कागजी दुनिया में सहेजा नहीं।
दूध की खाली बोतल दिखा दिखा कर कहीं दुत्कारी जाती दूध की खाली बोतल दिखा दिखा कर कहीं दुत्कारी जाती
हाट में -बाज़ार में लोगों की भीड़ में गन्दी और फटा कपड़ा पहन कर टहलते देखा हूँ। हाट में -बाज़ार में लोगों की भीड़ में गन्दी और फटा कपड़ा पहन कर टहलते ...