Antariksha Saha
Tragedy Action Classics
घाव कुछ गहरे थे नज़र उठाई तोह चेहरे सिर्फ आपने थे गैरों मे वह बात कहाँ अपनों को जो दिल ने सहा
मूरत
घाव कुछ गहरे ...
ख़ामोशी
मजदूर
झूठी मुस्कान
लक्ष्य
फ़ोन नंबर
मीठी चासनी
घर
angrayian
मैं दिल से मजबूर हूँ अपने और वो दुनियादारी से। मैं दिल से मजबूर हूँ अपने और वो दुनियादारी से।
हर प्राणी बेचैन है, धरती हुई अधीर। इंद्रदेव कर के कृपा, बरसा दो कुछ नीर।। हर प्राणी बेचैन है, धरती हुई अधीर। इंद्रदेव कर के कृपा, बरसा दो कुछ नीर।।
तेरे लंबे बाल और गुलपोशी के चर्चे हर जगह थे खुबसूरती बेहद थी तुझमें पर पहरे हर जगह थे. तेरे लंबे बाल और गुलपोशी के चर्चे हर जगह थे खुबसूरती बेहद थी तुझमें पर पहरे ह...
यही फलन है जब नवपीढ़ी आँसू से सन जाती है सहिष्णुता जब हद से बढ़ती कायरता बन जाती है ... यही फलन है जब नवपीढ़ी आँसू से सन जाती है सहिष्णुता जब हद से बढ़ती कायरता बन जाती ह...
बस जन्म जहाँ परिचायक हो, फिर चाहे योग्य या नालायक हो। बस जन्म जहाँ परिचायक हो, फिर चाहे योग्य या नालायक हो।
कुछ टूट रहा था, कुछ छूट रहा था, लेखन से नाता टूट रहा था। कुछ टूट रहा था, कुछ छूट रहा था, लेखन से नाता टूट रहा था।
संसद में हो या गलियों में, नारी का अपमान गलत है । संसद में हो या गलियों में, नारी का अपमान गलत है ।
अपने घर का हाल देखकर,चुप रहना मत रोना अम्मा । अपने घर का हाल देखकर,चुप रहना मत रोना अम्मा ।
सात दिनों के सात रंग में रंगी हुई इसकी प्रेम कहानी है। सात दिनों के सात रंग में रंगी हुई इसकी प्रेम कहानी है।
बिखर रहा है किसी नीड़ सा, तिनके- तिनके प्यार । बिखर रहा है किसी नीड़ सा, तिनके- तिनके प्यार ।
घर घर जाके सबको हम सपना यही दिखाएंगे अच्छे दिन आएँगे, अच्छे दिन आएँगे। घर घर जाके सबको हम सपना यही दिखाएंगे अच्छे दिन आएँगे, अच्छे दिन आएँगे।
अब स्वतंत्र है वो तो पराश्रित मैं भी नहीं इस अर्थहीन पानी का अर्थ कुछ भी नहीं। अब स्वतंत्र है वो तो पराश्रित मैं भी नहीं इस अर्थहीन पानी का अर्थ कुछ भी नहीं...
दूर कहीं दिख रहा था एक अस्थि पिंजर, जिस पर रह गया था बस मॉंस चिपक कर। दूर कहीं दिख रहा था एक अस्थि पिंजर, जिस पर रह गया था बस मॉंस चिपक कर।
छाती से चिपकाकर सुधियाँ पीड़ाओं ने लोरी गायी ! छाती से चिपकाकर सुधियाँ पीड़ाओं ने लोरी गायी !
तथा स्क्रीन पर आ गए भगत, सुभाष और अन्य वीर क्रांतिकारी। तथा स्क्रीन पर आ गए भगत, सुभाष और अन्य वीर क्रांतिकारी।
नौकरी कर घर लौटती औरत बेहद थकी होती है. नौकरी कर घर लौटती औरत बेहद थकी होती है.
मेरे हिंदू मुस्लिम बच्चों को आपस में लड़ाया जाता है मेरे हिंदू मुस्लिम बच्चों को आपस में लड़ाया जाता है
कुछ भी करें आज़ाद है अब तो हम, अधिकार ही हैं,फर्ज़ कहाँ मानते हैं। कुछ भी करें आज़ाद है अब तो हम, अधिकार ही हैं,फर्ज़ कहाँ मानते हैं।
औंधी पड़ी हुई धरती पर, निपट अभागिन छाँव। औंधी पड़ी हुई धरती पर, निपट अभागिन छाँव।
आखिर क्यों लाखों परिवार न्याय से वंचित रह जाते है। आखिर क्यों लाखों परिवार न्याय से वंचित रह जाते है।