STORYMIRROR

AVINASH KUMAR

Romance Tragedy

4  

AVINASH KUMAR

Romance Tragedy

मुझसे रिश्ते तुमने

मुझसे रिश्ते तुमने

2 mins
261

मुझसे रिश्ते तुमने इतने बिगाड़े तो नहीं होंगे

मेरे बाद मेरे ख़त तुमने फाड़े तो नहीं होंगे

खैर अब इश्क़ की उन लज़्ज़तों में क्या है

मगर लोग पूछेंगे जब इन ख़तों में क्या है 

उनको तब खोलोगी मेरे बिना तो

जवाब देती रहना


मेरी तरफ़ अपनी आँखें सिकोड़ रखीं थीं

तुमने अपनी मजबूरियाँ ओढ़ रखीं थीं

क्या होगा कभी जो मेरा हाल पूछेगी 

तुम्हारी रूह जब तुमसे सवाल पूछेगी

जब इतना सोचोगी मेरे बिना तो

जवाब देती रहना


तुम्हारी हर एक ज़िद मैंने स्वीकार की है

मगर एक ज़िन्दगी इस ज़िन्दगी से पार भी है

उस विधाता के लिखे को मिटाकर के

मैं पहुँचूँगा उस तरफ़ गर्व से सर उठाकर के

तुम जब अकेली पहुँचोगी मेरे बिना तो

जवाब देती रहना


मुझसे रिश्ते तुमने इतने बिगाड़े तो नहीं होंगे

मेरे बाद मेरे ख़त तुमने फाड़े तो नहीं होंगे

खैर अब इश्क़ की उन लज़्ज़तों में क्या है

मगर लोग पूछेंगे जब इन ख़तों में क्या है 

उनको तब खोलोगी मेरे बिना तो

जवाब देती रहना


मेरी तरफ़ अपनी आँखें सिकोड़ रखीं थीं

तुमने अपनी मजबूरियाँ ओढ़ रखीं थीं

क्या होगा कभी जो मेरा हाल पूछेगी 

तुम्हारी रूह जब तुमसे सवाल पूछेगी

जब इतना सोचोगी मेरे बिना तो

जवाब देती रहना


तुम्हारी हर एक ज़िद मैंने स्वीकार की है

मगर एक ज़िन्दगी इस ज़िन्दगी से पार भी है

उस विधाता के लिखे को मिटाकर के

मैं पहुँचूँगा उस तरफ़ गर्व से सर उठाकर के

तुम जब अकेली पहुँचोगी मेरे बिना तो

जवाब देती रहना


मंजिलें बेमतलब खामखां इतराती है

सफ़र का असली मजा तो रास्ते लूटते हैं

अकेले होकर मैं चल रहा हूं साथ लेकर तुझे

तुम साथ अगर चलती तो बात कुछ और होती



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance