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Minal Aggarwal

Tragedy

4  

Minal Aggarwal

Tragedy

वह एक पल की चूक

वह एक पल की चूक

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जीवन 

कुछ कुछ 

एक आंच पर 

पतीली में खौलने के लिए रखे हुए 

दूध की तरह है 

जरा सी आंख चूकी नहीं कि 

दूध बर्तन से बाहर निकलकर 

चारों तरफ फैल जाता है 

जब सबकुछ अनचाहा घटित हो 

जाता है तो 

हम मन ही मन बुदबुदाते हैं 

खुद को कोसते हैं कि 

थोड़ी सी नजर न हटाती 

आंच पर से बर्तन को समय 

रहते हटा देती तो 

इतना काम बिना बात के 

यूं तो न बढ़ता 

बना बनाया काम यूं तो न बिगड़ता 

लेकिन वह एक पल की चूक तो 

कई बार किसी का पूरा जीवन ही 

बदल कर रख देती है 

कई बार हम जानबूझकर या 

जाने अनजाने गलती कर 

बैठते हैं 

उसका खामियाजा भी 

फिर भुगतते हैं पर 

समय रहते नहीं मानते 

कई बार कुछ घटनायें

हमारे नियंत्रण से बाहर होती हैं 

हम दूसरों की गलतियों के 

शिकार भी बनते हैं 

यह हमारी बदकिस्मती और 

हमारे जीवन की बहुत बड़ी 

अनचाही दुर्घटनायें होती हैं

कई बार हमारे निर्णय 

गलत होते हैं या 

हम कई बार दूसरों के 

अधीन भी होते हैं 

मुझे तो जीवन रहते 

हमेशा ही यह अफसोस रहेगा कि 

मैंने अक्सर ही 

अपने परिवार को 

अपना समझा और 

हर किसी पर 

खुद से भी अधिक 

भरोसा किया 

उसका नतीजा 

कई बार 

घर परिवार में 

अपनों की अनदेखी,

उनकी उचित देखभाल का न 

होना और 

उनकी असमय मृत्यु 

दूसरों पर निर्भर रहना 

उनकी तरफ एक उम्मीद भरी 

नजरों से ताकते रहना कि

वह उठकर हर समस्या का 

समाधान कर देंगे 

हर मुसीबत में 

कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे 

तुम उन्हें पुकारोगे और 

वह हमेशा ही तुम्हें 

प्रति उत्तर देंगे 

तुम्हारा सहयोग करेंगे 

तुम्हारा समर्थन करेंगे 

ऐसा नहीं होगा 

यह समय रहते 

समझना था 

और इस भ्रम के भंवर से 

बाहर निकलना था 

किसी को प्यार करना 

अच्छी बात है 

सपनों की दुनिया में जीना 

और भी अच्छी बात है 

लेकिन 

समय की बदलती परिभाषाओं

का 

समय समय पर 

मूल्यांकन करके 

उनके साथ समायोजन 

करके 

यथार्थ के धरातल पर 

सच्चाई के बिखरे पड़े 

सच्चे मोतियों की तलाश भी 

कई बार आवश्यक हो 

जाती है।


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