शहीदों की अमर गाथा
शहीदों की अमर गाथा
माटी ने जब जब पुकारा था,
वीरों ने अपना शीश चढ़ाया था,
हँसते-हँसते अपने प्राण त्यागें,
भारत को जो आज़ाद कराना था।
उन वीरों को शत-शत नमन,
उन वीरों को शत-शत नमन।
न आँखों में भय का साया था,
न मृत्यु का कोई डर था,
सीने में बस भारत माता,
होंठों पर वंदे मातरम् था।
फाँसी का फंदा फूल बना,
जब वीरों ने उसको चूमा था,
माँ भारती की गोद में जाकर,
अमरत्व का दीप जलाया था।
जब जब माटी ने पुकारा था,
वीरों ने तिलक लगा अपना
खून बहाया था,
हँसते-हँसते प्राण त्यागें
आज़ादी का तिरंगा लहराया था।
उन वीरों को शत-शत नमन,
उन वीरों को शत-शत नमन।
किसी ने रण में ललकारा,
किसी ने क्रांति की मशाल जलाई थी
किसी ने कैद स्वीकारा फिर भी,
आजादी की लौ न बुझने पाई थी।
किसी ने गोली सीने पर खाई,
किसी ने हँसते हंसते फाँसी पाई,
हर बलिदान की अमर कहानी,
भारत की धड़कन बन आई।
वे केवल इतिहास नहीं थे,
वे भारत का स्वाभिमान थे,
उनकी साँसों में देश बसा था,
वे मिट्टी की सच्ची पहचान थे।
उनके लहू की हर एक बूँद ने,
आजादी का बीज बोया था,
जिस धरती पर हम साँसें लेते,
उसको इन वीरों ने सींचा था।
भाव-पुल
सोचो, कैसी रही होगी वो रात,
जब घर से निकले होंगे वीर,
माँ की आँखों में आँसू होंगे,
पर माथे पर होगा गर्व गंभीर।
किसी बहन ने राखी थामी होगी,
किसी पत्नी ने राह निहारी होगी,
किसी पिता ने काँपते हाथों से,
माटी की सौगंध उतारी होगी।
उन्होंने अपना आज दिया था,
ताकि हमारा कल मुस्काए,
उन्होंने अपने सपने छोड़े,
ताकि भारत अपने सपने सजाए।
उनके त्याग की छाया में,
हमने स्वतंत्र गगन पाया है,
अब हमारी भी जिम्मेदारी है—
भारत को और महान बनाएँ।
मुखड़ा
माटी ने जब पुकारा था,
वीरों ने शीश चढ़ाया था,
हँसते-हँसते प्राण त्यागें,
भारत को आज़ाद कराया था।
उन वीरों को शत-शत नमन,
उन वीरों को शत-शत नमन।
जब-जब तिरंगा लहराएगा,
उनका बलिदान याद आएगा,
जब-जब भारत जय बोलेगा,
वीरों का स्वर उसमें गूँजेंगा।
नमन तुम्हें ऐ अमर शहीदों,
नमन तुम्हारे बलिदानों को,
जब तक सूरज-चाँद रहेगा,
तब तक हिंदुस्तान रहेगा,
सबके होंठों पे तुम्हारा नाम रहेगा।
तुमने जो दीप जलाया था,
वो दीप सदा जलता रहे,
भारत माँ का शीश सदा ऊँचा,
हर भारतीय का मन कहे—
“शहीदों के सपनों का भारत,
हम मिलकर साकार करेंगे,
माँ भारती की आन के खातिर,
हर पल तुमको याद करेंगे।
”
वंदे मातरम्!
जय हिन्द!
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित सर्वाधिकार सुरक्षित रचना -
द्वारा-
सपन बिस्वास।
विरमगाम, गुजरात।।
