STORYMIRROR

Ritu Agrawal

Romance

4  

Ritu Agrawal

Romance

सड़क

सड़क

1 min
333

अपनी कच्ची उम्र के मासूम जज़्बातों की पगडंडी पर,

गाढ़े इश्क का तारकोल डालकर पक्की सी सड़क बनाई।

जो मेरे दिल से तेरे दिल तक पहुँच,रूह में जा समाई।

अब रोज बुहारती हूँ ये सड़क अपनी थकी पलकों से,

रोज पखारती हूँ इसे अपनी जुदाई के खारे आँसुओं से,

फिर हरसिंगार के फूलों की तरह बिछाती हूँ इस पर, 

परदेस से भेजे तेरे महकते, पीले पड़ चुके प्रेम-पत्र।

पर बिछोह की धूप में ये सड़क चटकती सी लगती है,

हमारे दिलों के रास्तों से कुछ भटकती सी दिखती है।

खयाल रखना प्रिय! कहीं वक्त के आँधी-तूफ़ान से,

झूठ- अविश्वास या अतिसंवेदनशीलता की वर्षा से,

ये मोहब्बत की पक्की सड़क उखड़ने न लग जाए।

और हमारा इश्क इस बारिश में,जल समाधि न ले जाए।

आ सनम!इश्किया सड़क पे इक-दूजे को गले लगा लें।

अपने बिखरते प्रेम को समेटकर इसी सड़क किनारे,

अपने अमर प्रेम का,चिरस्थाई पक्का घरौंदा बना लें। 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance