सारी वसुधा एक है
सारी वसुधा एक है
बरगद की दृढ़ डालियों
घनी -घनी छांव तले।
कितने पनपे बढ़े पले
जब जब आए धूप अपार
बरगद ने दी बाहें पसार।
बारिश हुई झमाझम आज,
आश्रय दे बरगद बेताज।
बरगद की छाया है ऐसी
दुख सभी के दूर करें,
जीव जंतु कितनों का
इसकी ही खो हो में जीवन गुजरे।
मुखिया यह परिवार का,
आशीष भरे आंचल की छांव,
हृदय विशाल स्वागत को आतुर।
जो भी आए इसकी छांव
ऐसी अनुपम और अनोखी
देखो है बरगद की छांव।
