STORYMIRROR

रिश्वत

रिश्वत

1 min
440


आँखों ने जुगनू को उजाले में चमकते देखा

बेवफ़ा जुगनू निकला या अंधेरे ने रिश्वत ली थी।


आपने बस कह दिया और हमने मान लिया

पर धूप में बरसने की बादलों ने रिश्वत ली थी।


हम तो आदतन कभी शायर थे ही नहीं

पर आपने तारीफ करने की रिश्वत ली थी।


कल ही की बात है, किसी बात पे मैंने रोना चाहा,

कमबख्त आँसुओं ने भी आँखों से रिश्वत ली थी।


नादान दिल ढूंढता रहा पानी में नशे की कैफियत

क्या पता कि साकी ने शराब से रिश्वत ली थी।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama