STORYMIRROR

V. Aaradhyaa

Classics Fantasy Inspirational

4  

V. Aaradhyaa

Classics Fantasy Inspirational

राह तिहारी तक रही मैं

राह तिहारी तक रही मैं

1 min
392

राह तिहारी तक रही हूँ मैं अज्ञानी अम्बे,

तुम अपने अब्लमंबन का सहारा दे दो !


आज पधारो मेरे मन मंदिर में दुर्गे माँ,

मेरे ओसारे पर भी उजियारा कर दो !


सदा जयकार हो तेरा ऊंचा दरबार मैया,

तेरी कृपा अनोखी तेरी महिमा अपरम्पार !


तेरे दरस को मेरी अँखियाँ तरसी जाती हैँ,

मुझे मुझधार से निकालकर किनारा दे दो !


भक्तिभाव व प्रेमभाव की कोई कीमत नहीं होती,

शुद्ध हृदय से बढ़कर पूजन की सामग्री नहीं होती !


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics