राह तिहारी तक रही मैं
राह तिहारी तक रही मैं
राह तिहारी तक रही हूँ मैं अज्ञानी अम्बे,
तुम अपने अब्लमंबन का सहारा दे दो !
आज पधारो मेरे मन मंदिर में दुर्गे माँ,
मेरे ओसारे पर भी उजियारा कर दो !
सदा जयकार हो तेरा ऊंचा दरबार मैया,
तेरी कृपा अनोखी तेरी महिमा अपरम्पार !
तेरे दरस को मेरी अँखियाँ तरसी जाती हैँ,
मुझे मुझधार से निकालकर किनारा दे दो !
भक्तिभाव व प्रेमभाव की कोई कीमत नहीं होती,
शुद्ध हृदय से बढ़कर पूजन की सामग्री नहीं होती !
