प्यासे तेरे इश्क में
प्यासे तेरे इश्क में
इस बरसती बारिश में सनम, तेरी याद या रही है,
बादलो की भयानक गर्जना से, हम बैचेन हो रहे है।
चमकती ईस बिजली में सनम, तेरी सूरत दिख रही है,
तेरी वापस आने की आहट से, हम मन से तड़प रहे है।
तेरी स्वागत की तैयारी में सनम, इश्क की सैज सज रही है,
मेरे दिल में खूले हुए मैखाने से, ईश्क की जाम छलक रही है।
तेरे बेसूमार हूश्न से सनम, प्यास इश्क की बढ़ रही है,
तेरी विरह की आग में जलकर, हम घायल बन गये है।
बसालें मुजे तेरे दिलमें सनम, हम तेरा ईन्तज़ार कर रहे है,
तेरी बांहोंमें सिमटकर "मुरली", हम मदहोंश बनना चाहतें है।

